Mere Bane ki baat na puchho- Traditional Nizami Brothers

कामिल शत्तारी-
https://sufinama.org/kalaam/mere-bane-kii-baat-na-puuchho-meraa-banaa-hariyaalaa-hai-kamil-shattari-kalaam?lang=hi
मेरे बन्ने की बात न पूछो मेरा बन्ना हरियाला है
ख़ुसरव-ए-ख़ूबाँ सरवर-ए-आलम ताज शफ़ाअत वाला है

हुस्न के चर्चे उस के दम से रौनक़-ए-आलम उस के क़दम से
नूर के साँचे में क़ुदरत ने उस को कुछ ऐसा ढाला है

फैला हुआ है दामन-ए-रहमत कितनी ख़ुश-क़िस्मत है ये उम्मत
सारे गुनहगारों पर उस ने कमली का पर्द: डाला है

देखो उसी के नूर से दो-जग जगमग जगमग जगमग जगमग
उस के रुख़-ए-रौशन ही से तो ये सारा उजियाला है

मय से भरे पैमाने हैं या मुस्तक़िलन मय-ख़ाने हैं
आँखों में आँखें मेरे बने की कौन ऐसा मतवाला है

नबी वली सब उस के बराती किस में उस की बात है आती
‘कामिल’ मेरा राज-दुलारा सब से अरफ़ा-ओ-आ’ला है <br> <h3>Auto Generated Captions</h3>

Leave A Reply

Your email address will not be published.

This website uses cookies to improve your experience. We'll assume you're ok with this, but you can opt-out if you wish. Accept Read More