Kalam Bedam Shah Warsi -Woh chale chhatak ke daaman

वो चले झटक के दामन मिरे दस्त-ए-ना-तवाँ से

उसी दिन का आसरा था मुझे मर्ग-ए-ना-गहाँ से

मिरी बे-कसी का आ’लम कोई उस के जी से पूछे
मिरी तरह लुट गया हो बिछड़ के कारवाँ से

मुझे ख़ाक में मिला कर मिरी ख़ाक भी उड़ा दे
तिरे नाम पर मिटा हूँ मुझे क्या ग़रज़ निशाँ से

इसी ख़ाक-ए-आस्ताँ में किसी दिन फ़ना भी होगा
कि बना हुआ है ‘बेदम’ उसी ख़ाक-ए-आस्ताँ से <br> <h3>Auto Generated Captions</h3>

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