Ai ri sakhi more Piya ghar aaye – Girish Sadhwani

मोरे पिया घर आए

ऐ री सखी मोरे पिया घर आए

भाग लगे इस आँगन को

बल-बल जाऊँ मैं अपने पिया के

चरण लगायो निर्धन को

मैं तो खड़ी थी आस लगाए

मेहंदी कजरा माँग सजाए

देख सुरतिया अपने पिया की

हार गई मैं तन-मन को

जिस का पिया संग बीते सावन

उस दुल्हन की रैन सुहागन

जिस सावन में पिया घर नाहीँ

आग लगे उस सावन को

अपने पिया को मैं किस विध पाऊँ

लाज की मारी मैं तो डूबी डूबी जाऊँ

तुम ही जतन करो ऐ री सखी री

मैं मन भाऊँ साजन को <br> <h3>Auto Generated Captions</h3>

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